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वैदिक दण्ड विधान और लोकपाल विधेयक

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वेद के अनुसार जिस गलती को एक आम आदमी करता है और उसी गलती को प्रथम श्रेणी का आदमी करता है, तो आम आदमी के मुकाबले पर प्रथम श्रेणी के आदमी को आठ गुणा दण्ड अधिक मिलना चाहिये । जैसे जिस समय द्वापर काल ( अब से लगभग 5200 वर्ष पूर्ण ) में युवराज युधिष्ठिर व युवराज दुर्योधन में से राजा चुनने हेतु पात्रता परीक्षा का आयोजन हुआ, तो प्रश्न रखा गया था कि चार मानव है, उनमें एक ब्राह्मण, एक क्षत्रिय, एक वैश्य और एक शुद्र है । उन्होंने एक निअपराध मानव की हत्या कर दी है, तो उनको दण्ड देने की प्रक्रिया किस प्रकार की जाये । इसके उत्तर हेतु सर्वप्रथम दुर्योधन को आमंत्रित किया गया । दुर्योधन ने उत्तर में कहाँ कि चारों को समान रूप में दण्ड दिया जाये । फिर युधिष्ठिर को आमंत्रित किया गया, तो वैदिक दण्ड विधान को जानने वाले युधिष्ठिर ने अपने उत्तर में कहाँ कि इन चारो अपराधियों में से शुद्र को चार वर्ष का दण्ड देना चाहिये, क्योंकि इसका ज्ञान कम है । फिर वैश्य के प्रति कहाँ कि यह शुद्र से अधिक ज्ञानवान है तथा व्यापार, कृषि व पशु पालन में कुशल है, इसको आठ वर्ष का दण्ड देना चाहिये । फिर क्रम क्षत्रिय का आता है, इसमें युधिष्ठिर ने कहाँ कि क्षत्रिय पर जनता की रक्षा का दायित्व होता हैँ, इसने अपने दायित्व का उलंघन कर अनुचित कदम उठाया है, इसलिये इसको सौलह वर्ष का दण्ड देना चाहिये । फिर क्रम ब्राह्मण का आता है, इसमें युधिष्ठिर ने कहा कि ब्राह्मण का कार्य सर्व समाज को शिक्षा देना हैँ, ब्राह्मण गुरू होता है और जैसा गुरू होता है, वैसा ही शिष्य अर्थात समाज बनता हैं । अतः इस ब्राह्मण को बत्तीस वर्ष का दण्ड देना चाहिये । इसी प्रकार मंत्री को सहस्र गुणा और राजा को सबसे अधिक दण्ड देना चाहिये ।
इसी प्रकार लोकपाल में दण्ड की व्यवस्था होनी चाहिये । चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को प्रारंभिक दण्ड दिया जाना चाहिये तथा प्रथम श्रेणी के कर्मचारीयों ( आईँ ए. एस. व राजनेताओं आदि ) को अधिक दण्ड दिया जाना चाहिये । जो जितने महत्वपूर्ण पद पर है, उसको उतना अधिक दण्ड दिना चाहिये । वर्तमान भारत में प्रधानमंत्री की राजा के समान सर्वोच्च मान्यता है, अगर वो कोई गलत कार्य करता है तो वो सबसे अधिक दण्ड पाने का अधिकारी है । क्योंकि कहा गया है, कि यथा राजा तथैव प्रजा । इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को स्वयं लोकपाल विधेयक के दायरे में आना स्वीकार कर लेना चाहिये ।

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